Karva Chauth – The Eternal Bond of Love

करवा चौथ (Karva Chauth) मुख्यत उत्तर भारत (North India) में विवाहित (Married) महिलाओं (Women) द्वारा मनाया जाने वाला एक दिवसीय त्योहार (festival) है, जिसमें पत्नी (Wife) अपने पति (Husband) की सुरक्षा (Safety) और लंबी उम्र (Longevity) के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय (Sunrise to Moonrise) तक उपवास (Fast) रखती है| सुहागिन महिलाये निर्जल व्रत रखकर चन्द्रमा के दर्शन और अर्ध्य देने के बाद व्रत खोलती है| यह त्यौहार परंपरागत रूप से राजस्थान (Rajasthan), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), गुजरात (Gujarat), महाराष्ट्र (Maharashtra), हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh), हरियाणा (Haryana) और पंजाब (Punjab) के कुछ हिस्सों के राज्यों में मनाया जाता है। यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह (Kartik Month) में मनाया जाता है| कुछ अविवाहित महिलाओं (Unmarried Women) अपने मंगेतर (Fiances) या वांछित पति (Desired Husbands) के लिए करवा चौथ व्रत (Karva Chauth Vrat) रखती है|

Karva Chauth Festival in India

कुछ पुरुष भी अपनी पत्नियों की लम्बी उम्र (Long Life) और अच्छे स्वास्थ्य (Good Health) के लिए यह व्रत रखते है और कुछ अविवाहित पुरुषों द्वारा सुंदर पत्नियों (Beautiful Wives) पाने के लिए ये व्रत रखा जाता है|

करवा चौथ सुंदर सौभाग्य का व्रत है, इस बार 30 अक्टूबर, 2015 को है| यह व्रत अलग-2 जगह और के अनुसार प्रचलित मान्यताओ के हिसाब से मनाया जाता है लेकिन सार सभी का एक होता है पति की दीर्घायु|

यह व्रत 12 या 16 वर्ष तक अनवरत किया जाता है, अवधि पूरी होने के पश्चात व्रत का उद्यापन, (जिसको कार्तिक उद्यापन भी कहा जाता है) किया जाता है। सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन भी इस व्रत को रख कर सतत पालन करती रहे, इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है।

भारत में वैसे तो चौथ माता जी के बहुत मंदिर है, लेकिन सबसे प्राचीन और ख्याति प्राप्त स्थान राजस्थान में सवाई माधोपुर जिले के चौथ के बरवाडा गाँव में स्थित है|

करवा चौथ की रस्में और विधि – Karva Chauth Rituals

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी को सुहागिन महिलाएं सुबह स्नान और सोलह श्रृंगार (Shringar) करके अपने सुहाग की आयु, आरोग्य और सौभाग्य का संकल्प लेकर दिनभर निराहार रहें।

करवा चौथ की पूजा (Karva Chauth Puja) के लिए उपवास कर रही महिलाएं एक गोलाकार चक्र (Circle) बनाकर बैठ जाती है और गाना गाते हुये अपनी पूजा की थाली (Feris) को एक दुसरे की तरफ चक्र में घुमाती है| करवा चौथ की पूजा करने के बाद महिलाये सूर्य की दिशा में पानी की पेशकश करते हुये अर्क (Arka) देती है|

करवा चौथ फेरिज गाना – Karva Chauth Feris Songs

पहली छ फेरिज के लिए ये गाया जाता है :-

“…..वीरो कुड़िये करवारा (Veero Kudiye Karvara), सर्व सुहागन करवारा (Sarv Suhagan Karvara), ऐ कट्टी नया तेरी ना (Aye Katti Naya Teri Naa), कुंभ चराखरा फेरी ना (Kumbh Chrakhra Feri Naa), आर पैर पायीं ना (Aar Pair Payeen Naa), रूठडा मानिये ना (Ruthda Maniyen Naa), सुतडा जगायीं ना (Suthra Jagayeen Naa), वे वीरो कुड़िये करवारा (Ve Veero Kuriye Karvara), वे सर्व सुहागन करवारा (Ve Sarv Suhagan Karvara)……”

सातवें फेरी के लिए ये गाया जाता है :-

“…..वीरो कुड़िये करवारा (Veero Kudiye Karvara), सर्व सुहागन करवारा (Sarv Suhagan Karvara), ऐ कट्टी नया तेरी नी (Aye Katti Naya Teri Nee), कुंभ चराखरा फेरी भी (Kumbh Chrakhra Feri Bhee), आर पैर पायीं भी (Aar Pair Payeen Bhee), रूठडा मानिये भी (Ruthda Maniyen Bhee), सुतडा जगायीं भी (Suthra Jagayeen Bhee), वे वीरो कुड़िये करवारा (Ve Veero Kuriye Karvara), वे सर्व सुहागन करवारा (Ve Sarv Suhagan Karvara)……”

उत्तर प्रदेश और राजस्थान में महिलाएं एक-दुसरे से करवा (Karvas) को सात बार (Seven Times) आदान-प्रदान (Exchange) करती है| राजस्थान में पानी की पेशकश करने से पहले उपवास कर रही महिला से पूछा जाता है “धापी की नी धापी?’’ (Dhapi ki Ni Dhapi?) पूछा जाता है| फिर वो प्रतिक्रिया स्वरुप कहती है “जल से धापी, सुहाग से ना धापी|” (Jal se Dhapi, Suhaag se na Dhapi)| राजस्थान में, परिवार में बड़ी उम्र की महिलाओं द्वारा करवा चौथ (Karva Chauth), शिव-पार्वती (Shiv-Parvati) और गणेश (Ganesh) की कहानियों (Stories) सुनायी जाती है| पूजा की थाली में एक मिट्टी के दीपक रोशनी (Lights an Earthen Lamp), सिंदूर (Sindoor), अगरबत्ती (Incense Sticks) और चावल (Rice) भी रखा जाता है।

फेरा समारोह (Fera Ceremony) होने के बाद उपवास कर रही महिलायें चाँद के निकलने का इंतज़ार (Rising of the Moon) करती है|

करवा चौथ की परंपरागत कहानियाँ – Karva Chauth Traditional Tales

रानी वीरावती की कहानी – The Story of Queen Veervati
महाभारत के महान योद्धा – The Legend of Mahabharata
करवा के महान योद्धा – The Legend of Karva
सत्यवान और सावित्री की कहानी – The Story of Satyavan and Savitri

पूजन की विधि, नैवेद्य, करवा की संख्या

करवा चौथ के दिन भगवान शिव-पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय स्वामी एवं चंद्रमा का पूजन करे| पूजा के लिए बालू या सफ़ेद मिट्ठी की वेदी बनाकर उपरोक्त सभी देवी-देवताओं को स्थापित करे| नैवेद्य हेतु शुद्ध घी में आटे को सेंककर उसमें शक्कर अथवा खांड मिलाकर मोदक/लड्डू बनाएँ। काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी के करवे अथवा तांबे के बने हुए करवे। 10 अथवा 13 करवे अपनी सामर्थ्य अनुसार रखें।

पूजन हेतु निम्न मंत्र बोलें –

‘ॐ शिवायै नमः’ से पार्वती का, ‘ॐ नमः शिवाय’ से शिव का, ‘ॐ षण्मुखाय नमः’ से स्वामी कार्तिकेय का, ‘ॐ गणेशाय नमः’ से गणेश का तथा ‘ॐ सोमाय नमः’ से चंद्रमा का पूजन करें।

करवे पर 13 बिंदी रखे और चावल या गेहू के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा सुने या कहे, कथा संपन्न होने के बाद करवे पर हाथ घुमाकर अपनी सास से आशीर्वाद ले और करवा उनको दे दे| 13 चावल या गेहू के दाने, टोंटीदार करवा और पानी का लोटा अलग रख देवे|
रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखे और चन्द्रमा को जल से अर्ध्य दे, पति और सास से आशीर्वाद लेकर उनको भोजन करवाये और खुद भी भोजन कर ले| सभी सुहागिन महिलाओं को करवा चौथ (Karva Chauth) की हार्दिक शुभ-कामनाये|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *