It’s ‘Incredible India’ not ‘Intolerant’ India

पिछले काफी दिनों से कुछ विशेष विचारधारा के लोगों द्वारा देश में असहिष्णुता के मुद्दे को बेवजह तूल दिया गया| कुछ साहित्यकारों ने अपने साहित्य अकादमी पुरस्कार (Sahitya Akademi Award) लौटा कर इस मामले को और ज्यादा हवा देने का काम किया, फिर तो जैसे देश में असहिष्णुता को लेकर ऐरे-गैरे नत्थू खैरे सभी कूद पड़े जो वास्तव में असहिष्णुता (Intolerance) का मतलब तक नहीं जानते उन्होंने भी बयां दे डालें|

Incredible India not Intolerant

जबकि करिश्माई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सत्ता में आने के बाद वास्तव में भारत को दुनियाभर में सम्मान और पहचान मिली है| भारतीय संस्कृति और उसका खोया हुआ गौरव लौट आया हैं, विदेशों में भारतीयों के लिए नजरिया भी बदला है और सम्मान का भाव भी| देश का प्रधान सेवक देश के विकास और खुशहाली के लिए दिन रात मेहनत कर रहा हैं| देश के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए विदेशी निवेश के लिए विदेशों की यात्राएं कर रहा हैं| नरेंद्र मोदी जी (Narendra Modi) के कार्य और प्रयास सुधार की दिशा में उठाये गए कदम हैं, जिसका परिणाम देश को आने वाले वर्षों में देखने को मिल जायेगा| वो कहते है ना “हथेली पर सरसों नहीं उगायी जा सकती” ठीक वैसे ही मर्ज़ पुराना है, ठीक होने में समय तो लगेगा ही|

आज़ादी के बाद देश ने काफी बुरे दौर देखे जिसमे 1984 का सिख नरसंहार और कश्मीर से कश्मीरी पंडितों का पलायन और कत्लेआम प्रमुख हैं| कुछ राजनेता और विशेष विचारधारा के लोग अपने आकाओं के इशारे पर देश की छवि और गरिमा को ठेस पंहुचा रहे हैं| 125 करोड़ जनसंख्या वाले देश में एक दो छोटी मोटी घटनाओं पर ऐसे बवाल मचाने और देश की गरिमा को आघात पहुचाने से कुछ हासिल नहीं होने वाला, सिर्फ 3-4 दिन के लिए मीडिया TRP मिल जायेगी| यदि वास्तव में देश की फ़िक्र है तो देश के सुधार में सहयोग दीजिये|

It’s ‘Incredible India’ not ‘Intolerant’ India

कुछ लोगों को और उनके परिवार को देश रहने लायक नहीं लगता वही यहाँ पिछले 1 साल से विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढोतरी हुई है| विदेशी लोग यहाँ की संस्कृति, गौरव, ऐतिहासिक धरोहरों, यहाँ के लोगों के प्रेम, रहन सहन, बोली, दूसरों के लिए मदद और मेहमाननवाजी के कायल हैं| पिछले 1 महीने में उन्होंने देश के अलग-2 हिस्सों में Visitors Book में देश को खुशनुमा बताया हैं|

भारतीय संस्कृति अनेकता और विविधता में एकता की मिसाल हैं, इसको अपनी निजी राय और राजनेतिक कारणों से धूमिल करने की इजाजत किसी भी इंसान को नहीं है| अगर किसी को देश का माहौल सच में डरा रहा है तो वो दुसरे देश का रुख कर सकते है, किसने रोका है उनको? देश के सैनिक जहां अपनी जान की परवाह किये बिना इस देश की रक्षा कर रहे है| और एक ताजुब की बात देखो जो लोग हमेशा अपने निजी अंगरक्षकों से गिरे रहते है, उनको डर लग रहा हैं|

मेरा भारत देश “अतुल्य भारत” (Incredible India) है, जिसकी संस्कृति “अतिथि देवो भव” (Atithi Devo Bhav) वाली हैं|

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