वर्तमान में इंसान या भेडचाल का हिस्सा? Mann Ki Baat – Vella Di

वर्तमान समय में इंसान की जगह जानवरों वाली प्रव्रति इंसानों में घर कर रही है| “हम” की जगह “मैं” शब्द हावी हो गया है| इन्सान अपने दुखों से दुखी नही है, दुसरे के सुखों से दुखी है…. और Vella Di बाबा  इसलिए दुखी है की ये क्या chutzpa हो रखा है हर तरफ, इंसानियत कहा मर गयी है? सब भेड़चाल का हिस्सा हो रहे है| संसार में सभी जीवों में मनुष्य में विवेक और समझ ऊपरवाले ने दी है, अच्छे बुरे की समझ के लिए दिमाग दिया है| लेकिन फिर भी इंसान-2 की जान माल का दुश्मन हो रखा है| परिवार तबाह हो रहे है, लोभ और लालच के कारण… आगामी पीड़ियो को विरासत में सम्पति कम विवाद ज्यादा मिल रहे है|

इंसान एक बात भूल रहा है कि जीवन जितना सच है मृत्यु भी उतना ही सच है, संसार में कुछ दिन के मेहमान है, उस वक़्त को प्यार भाईचारे से गुज़ारे, नाकि ईर्ष्या, नफरत और द्वेषपूर्ण की भावना से ग्रस्त होकर…..| बुरे कर्म और बुरी सोच दुसरे का कम अहित करती है, खुद का ज्यादा|

इन्सान ऊपरवाले के हाथों की कठपुतली है, दुनिया भगवान का रचा हुआ रंगमंच है और संसार का हर जीव उस रंगमंच की कठपुतली है, जिसकी डोर ऊपरवाले के हाथों में है| जीवन शतरंज की बाज़ी की तरह है जिसमे शह और मात का खेल चलता रहता है, आज आपकी जीत है तो कल हार भी होगी|

Vella Di Baba

मेरा तजुर्बा कहता है कि इन्सान को सर्वप्रथम अपने लिए, फिर परिवार के लिए, फिर दोस्तों, सगे-संबंधियों के लिए, फिर समाज के लिए उसके बाद बाकि लोगों के लिए| जीवन में एक नियम जरुर हर इंसान को अपनाना चाहिए, जिंदगी आपकी है कैसे भी जियो बस किसी को अपने स्वार्थ या किसी भी कारण से नुकशान और दुःख मत पहुचाओ| आज में जियो कल की फ़िक्र में आज का सत्यानाश मत करो, कल किसी ने नही देखा, देखा है तो सिर्फ आज| समय निकल रहा है, और जिंदगी एक निश्चित अवधि के लिए है, मरने के बाद इंसान अपने साथ सिर्फ अच्छे कर्म लेकर जाता है, पैसा धन-दौलत सब यही रह जाता है| ऊपरवाला आपको हर मोड़ पर याद दिलाता रहता है, कि अच्छे कर्म करो, ऊपर मेरे पास ही आना है| किसी इंसान की मौत पर मनुष्य 2-3 दिन के लिए सोचता है कुछ नही है एक दिन चले जायेंगे, लेकिन 2-3 दिन बाद ये सोच काफूर हो जाती है, इंसान फिर वही लोभ, लालच, नफरत का जीता जागता पुतला बन जाता है|

पुराने वक़्त में इंसानियत लोगों में जिंदा थी, गाँव की किसी भी महिला या बेटी की सब इज्ज़त करते थे, अपनी बेटी संमान मानते थे, लेकिन आज के समय में दरिंदगी इतनी हावी हो गयी है, की दूध पीती बच्ची को भी हवस की नज़र से देखा जाता है| यह सब पैसे की भूख है, जिसका कोई अंत नही, भोग विलास श्रनिक सुख देते है, लेकिन अच्छे कर्म आपको जन्मजन्मांतर तक ख़ुशी देंगे| जरूरतमंद इंसानों की सहायता करो, यदि आप इस काबिल हो तो, जिंदगी को एक बार अच्छाई के रास्ते पर भी चलकर जियो, जीवन और मृत्यु का सार समझ आ जायेगा| अच्छाईयों को अपने जीवन में ग्रहण करो और बुराईयों का त्याग करो, फिर जिंदगी भी खुशहाल होगी और मन और चित भी प्रसन्न|

शहरी और ग्रामीण दोनों जगह वक़्त गुज़ारा है मैंने, अच्छे और बुरे इंसानों के बीच रहा हु, अमीर और गरीब भी देखे है और इन् सबकी जिंदगी से एक सार निकाला है, जिंदगी कुछ समय की है, ना पैसा आपकी जिंदगी बढ़ा सकता है ना और कुछ, फिर किसलिए ये मोह-माया, लोभ-लालच, ईर्ष्या और नफ़रत?

सब बातो की एक बात इंसान बनो भेडचाल का हिस्सा नही… जीवन को अच्छे कामों में व्यतीत करो| इंसानों के लिए ख़ुशी की वजह बनो, दुःख का कारण नही| किसी से आपके विचार नही मिलते…कोई बात नही….उस से दूर हो जाओ….लेकिन उसका अहित मत करो| इंसानों के धरती पर किये कर्मो के हिसाब से ऊपर सज़ा या फल मिलेगा| फैसला आपका…. वो करो जो आप चाहते हो, लेकिन किसी को नुकसान या दुःख पहुचाकर नही….!! आशा करता हु इस लेख से आप कुछ सीख लेंगे और अपने जीवन में अमल करेंगे…..|

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