1920 London (2016) Movie Review: इस फिल्म को देखकर डरना हैं या हँसना यह आप खुद सुनिश्चित करे!

1920 फिल्म सीरीज की तीसरी फिल्म है “1920 लंदन” जो 6 मई, 2016 को सिनेमाघरों में रिलीज़ की गयी हैं| इस सीरीज की पिछली 2 फिल्मे 1920 (2008) और 1920: दा ईविल रिटर्न्स (2012) ने बिज़नस के लिहाज़ से अच्छी कमाई की थी और कामयाब रही थी| लेकिन, 1920 लंदन (2016) देखकर लगता हैं, यह फिल्म कुछ ज्यादा नहीं करने वाली, और इसका मुख्य कारण है की फिल्म देखकर आपको डर नहीं लगेगा और डर हॉरर फिल्मों (Horror Film) की आत्मा होता हैं| फिल्म में शरमन जोशी, विशाल करवाल और मीरा चोपड़ा ने मुख्य भूमिकाये अदा की है| इस फिल्म के ज़रिये टीनू सुरेश देसाई (Tinu Suresh Desai) ने निर्देशन के क्षेत्र में अपना बॉलीवुड डेब्यू किया हैं|

1920 London (2016) Film Story/Plot

1920 लंदन फिल्म की कहानी लंदन होते हुए राजस्थान पहुँचती हैं| फिल्म की कहानी राजकुमारी शिवांगी (Meera Chopra) की है जो लंदन में अपनी पति वीर सिंह (Vishal Karwal) के साथ रहती हैं। एक दिन शिवांगी को राजस्थान से एक खास तोहफा मिलता है जिसके बाद उनके पति वीर सिंह की तबियत बिगड़ने लगती है और वो अजीबो-गरीब हरकते करने लगता है। राजकुमारी को यकीन है कि ये सब काला जादू की वजह से हो रहा है। इसलिए वो अपने पति को लेकर वापस राजस्थान जाती है। यहां वो वीर को ठीक करने के लिए जय (Sharman Joshi) की मदद लेती है। जय शिवांगी का पुराना आशिक है और बुरी आत्माओं से लड़ता है। वीर को ठीक करने के लिए जय और शिवांगी को किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए आपको नजदीकी सिनेमाघरों में जाकर मूवी देखनी पड़ेगी|

Horror Film 1920 London (2016)

1920 London Movie Review & Rating

Vella Di Rating: 3.5/10

1920 लंदन फिल्म का टीज़र देखकर दर्शकों ने एक अच्छी हॉरर थ्रिलर मूवी की उम्मीद की थी जो मूवी देखकर धूमिल हो गयी| 1920 फिल्म सीरीज की पिछली दोनों फिल्मों की तुलना में यह फिल्म हर लिहाज़ से ख़राब हैं| बड़े बुजुर्गो को कहते सुना है कि “समय के साथ हर चीज़ और अच्छी और बेहतर होती जाती है, लेकिन यहाँ वक़्त के साथ चीज़े ख़राब और बदतर होती नज़र आ रही हैं|” इस फिल्म को देखकर आप डरेंगे तो नहीं लेकिन हंसी जरूर रोक नहीं पायेंगे|

किसी फिल्म में भूत होगा तो उसको भगाने के लिए एक तांत्रिक होगा, जादू टोने का का सहारा लिया जायेगा, डरावने चेहरे होंगे और भूत को भगाने की कुछ खास तरकीबे ढूढनी होगी| हॉरर फिल्म में यह सब जायज़ हैं, और इन्ही सब चीजों को मिक्स करके डर पैदा करना होता हैं| लेकिन 1920 लंदन में वो डर नज़र नहीं आया सिवाय एक-दो दर्श्यो के, इसके अलावा स्पेशल इफेक्ट्स आपको बिल्कुल लुभा नहीं पायेंगे और फिल्म के सवांद तो बहुत ज्यादा कमज़ोर हैं| इतना सब होने के बाद क्या आगे बात करनी चाहिए?? वैसे कुछ रह नहीं जाता लेकिन फिर भी फिल्म का पूरी तरह से पोस्टमार्टम किया जायेगा, ताकि आगे से फिर कोई निर्माता-निर्देशक हॉरर फिल्म के नाम पर दर्शकों को उल्लू ना बना सके|

फिल्म में कुछ भी नयापन नहीं हैं, सिवाय इसके की इस बार किसी हीरोइन को भूतनी नहीं बनाया गया बल्कि हीरो को भूत बनाया गया हैं|

फिल्म की कहानी का ढांचा कुछ हद तक ठीक है, लेकिन इसकी बारीकियों को सही ढंग से पिरोया नहीं गया। फिल्म का मध्यांतर प्वॉइंट रोचक है और ट्विस्ट भी दिलचस्प लगता है, लेकिन यह काफी नहीं हैं|

फिल्म के कलाकारों के अभिनय की बात की जाए तो यह सर्व-विदित है कि शरमन जोशी एक मंझे हुए एक्टर है, लेकिन इस फिल्म में वो काफी ज्यादा मिसफिट नजर आयेंगे। राजकुमारी के रॉयल रोल में मीरा चोपड़ा फीकी लगती हैं और बुरी आत्माओं से जूझ रहे विशाल करवाल के पास करने को कुछ ज्यादा नहीं था|

शारिब और तोशी साबरी के अलावा कौशिक-आकाश ने फिल्म में संगीत दिया है और और बैक-ग्राउंड स्कोर अमर मोहिले का है। इस फिल्म में 1965 में आई फिल “गुमनाम” फिल्म का एक गाना “गुमनाम है कोई” को शामिल किया गया हैं, इसके अलावा “आज रो लेन दे” ठीक-ठाक हैं| बाकी अन्य गीत जिसमें “आफरीन”, “तुझको मैं” और “रूठा क्यूँ” आपको सिनेमा हॉल से निकलने के बाद याद भी नहीं रहेंगे|

निर्देशन के क्षेत्र में रोजगार पाने को उतरे टीनू सुरेश देसाई ने पूरी तरह निराश किया हैं| फिल्म में हॉरर सीन काफी घिसे-पिटे और पुराने फ़ॉर्मूले पर आधारित हैं| फिल्म में सबकुछ नकली सा लगता हैं और बात की जाए ग्राफिक्स की तो आप भूत देख सकते हैं, लेकिन उस भूत को देखकर आप डरेंगे नहीं जबकि कम्प्यूटर ग्राफिक्स का जमाना ना होने के बावजूद रामसे ब्रदर्स के जमाने की फिल्में फिर भी आपको डरा जाती थीं| निर्देशक ने किरदारों के लुक में एकसमानता पर ध्यान नहीं दिया|

अगर आपको हॉरर फिल्मे देखना पसंद है और फिर आप शरमन जोशी के प्रसंशक है तो यह फिल्म आप कतई मत देखिए। फिल्म डराती नहीं हैं, इसलिए यह फिल्म आप देखने जाए या नहीं यह आप पर निर्भर करता हैं….. पैसा और वक़्त आपका!

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