हाउसफुल बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय कॉमेडी फिल्म सीरिज (comedy film series) है। इसके पिछले दोनों भाग व्यावसायिक रूप से काफी सफल रहे थे| हाउसफुल 3 (Housefull 3) के निर्देशन की बागडोर साजिद-फरहाद (Sajid-Farhad) की जोड़ी ने संभाली है और साजिद नादियावाला (Sajid Nadiadwala) ने फिल्म का निर्माण किया है। फिल्म में मुख्य भूमिकाओ में अक्षय कुमार, अभिषेक बच्चन, रितेश देशमुख, जैकलीन फ़र्नाडिस, लिसा हेडन, नरगिस फाखरी, बोमन ईरानी, चंकी पांडे और जैकी श्रॉफ ने अभिनय किया हैं| फिल्म में जिस टाइप का हास्य परोसा गया है उसको देखकर लगता है, यदि आप अपना दिलो-दिमाग घर रखकर जायेंगे तो यह फिल्म आपको भरपूर मनोरंजन दे|

Housefull 3 Movie Review 2016

Akshay Kumar Starrer Bollywood Comedy Film Housefull 3 (2016) Story

बटुक लाल (Boman Irani) अपनी तीन बेटियों गंगा उर्फ़ ग्रेसी (Jacqueline Fernandez), जमुना उर्फ़ जेनी (Lisa Haydon) और सरस्वती उर्फ़ सारा (Nargis Fakhri) के साथ लंदन में रहता है। वह नहीं चाहता कि उसकी तीनों जवान बेटियां शादी करें। गंगा का बॉयफ्रेंड सैंडी/सुंडी (Akshay Kumar) है तो जमुना का टैडी (Riteish Deshmukh) और सरस्वती का बंटी (Abhishek Bachchan)।

बटुक पटेल को जब तीनों के बॉयफ्रेंड होने की बात पता चलती है तो वह अपनी बेटियों को शादी ना करने के लिए मनाने के लिए लिए आखिरी पास्ता (Chunkey Pandey) की मदद लेता है और वह तीनों को कहता है की यदि गंगा ने शादी की तो उसके पति का पहला कदम घर में रखते ही उसके पापा मर जाएगा। यदि जमुना के पति ने बटुक को देखा और सरस्वती के पति ने पहली बार कुछ बोला तो बटुक की मृत्यु निश्चित है।

तीनों लड़कियां अपने बॉयफ्रेंड्स को यह बात बताती है। तीनों पैसे के लालची दिमाग लड़ाते हैं। एक अंधा बन जाता है, तो दूसरा लंगड़ा और तीसरा गूंगा बनकर बटुक लाल से मिलते है और उसके घर में ही उसके साथ रहने लगते हैं। उसके बाद पिता अपने हथकंडे अपनाता है और बेटियां अपने और बेटियों के प्रेमी अपने|

बटुक वर्षों पहले ऊर्जा नागरे (Jackie Shroff) के साथ काम करता था। ऊर्जा मुंबई का डॉन था और 18 वर्ष की जेल काटने के बाद वह बटुक से मिलने लंदन आता है। कहानी में उसके आने से कुछ उतार-चढ़ाव आते हैं और हैप्पी एंडिंग के साथ फिल्म खत्म होती है।

Housefull 3 Movie Review & Rating

Vella Di Rating: 5.5/10

हाउसफुल 3 पहला शो वाकई में हाउसफुल है लेकिन इसकी कहानी पूरी तरह गुल है| कहानी ना होने से पटकथा की कसावट बिल्कुल भी नज़र नही आती| फिल्म में कहानी का फैक्टर पूरी तरह मिसिंग है, और ऐसा ही लगता है कि सिर्फ जोक्स दिखाने के लिए ही फिल्म बनाई गई थी| कॉमेडी सीन दोहराव के शिकार हैं। वन लाइनर्स पर बहुत ज्यादा जोर दिया गया है और एक समय बाद ये अखरने लगते हैं। इस फिल्म में निर्देशक और लेखक का सारा ध्यान इस बात पर ही नज़र आया कि हर दर्शय में हास्य कैसे पैदा किया जाए|

फिल्म की हीरोइनों की हिंदी बहुत कमजोर है और इंग्लिश जुमलों का हिंदी अनुवाद, बहुत ही खराब लगता है, जैसे- लाइम लाइट को नींबू की रोशनी और लेट्स गो फॉर हैंग आउट को वे बोलती हैं चलो बाहर लटकते हैं| एक-दो बार तो इन संवादों को सुन हंस सकते हैं, लेकिन बार-बार नहीं।

फिल्म की शुरुआत बेहद ठंडी है। अक्षय, रितेश और अभिषेक के परिचय वाले सीन निहायत ही कमजोर है और कॉमेडी के नाम पर ट्रेजेडी है।
फिल्म में बहुत से संवाद अंग्रेजी में रखकर बड़ी गलती कर दी क्योंकि जिस दर्शक वर्ग को ध्यान में रखकर हाउसफुल 3 बनायीं गयी है उनको अंग्रेजी समझ नहीं आयेगी|

लेखक और निर्देशक के रूप में साजिद-फरहाद कुछ नया नहीं सोच पा रहे हैं। आखिर कब तक वे थके-मांदे चुटकुलों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे? इससे बेहतरीन चुटकले तो व्हाट्स एप पर पढ़ने को मिल जाते हैं। इस जोड़ी के लिए निर्देशन का मतलब लिखे हुए को फिल्मा देना| निर्देशन जैसे गंभीर काम को उन्होंने काफी ज्यादा हल्के में ले लिया है|

तीनों लड़के किस कारण से बटुक के घर में रहने आ जाते है, इसके पीछे कोई तर्क नहीं दिया गया|

हाउसफुल 3 के सबसे बड़े स्टार खिलाडियों के खिलाडी अक्षय कुमार ने कमाल का अभिनय किया है उनकी कॉमिक टाइमिंग, अजीबोगरीब चेहरे और हाव-भाव आपको हंसी का तगड़ा डोज देंगे और जिसके कारण आप इस वाहियात फिल्म को 2 घंटे तक बैठकर पूरी देख पायेंगे| अक्षय कुमार को रितेश और अभिषेक के बराबर दर्शय मिले जबकि वो ज्यादा के हकदार थे| अक्षय कुमार कॉमेडी में माहिर है और उनके अभिनय के लिए उनकी प्रंशसा की जायेगी, लेकिन बेबी, एयरलिफ्ट जैसी संजीदा फिल्म करने वाला इस तरह की बिना स्टोरीलाइन की फिल्म के लिए हाँ कैसे कह सकता है|

रितेश देशमुख ने भी अपनी कॉमिक टाइमिंग और अभिनय से हंसाया है लेकिन अभिषेक बच्चन और एक्टिंग का छत्तीस का आकड़ा लगता है वो एक रैपर के किरदार में बिल्कुल भी नही जचे|

बोमन ईरानी को फिल्म में सबसे ज्यादा फुटेज मिले हैं, लेकिन अजीब सी विग पहने वे एक्टिंग और ओवर-एक्टिंग के बीच की लाइन पर घूमते रहे।

फिल्म में तीन हसीनाओं पर बात की जाए जैकलीन फर्नांडिस, लिसा हेडन और नरगिस फाखरी में होड़ इस बात की थी कि कौन बुरी एक्टिंग करता है। ना ही पंच सही जगह मारे हैं ना ही डायलॉग। जब तक नरगिस फखरी हिंदी में चुटकुला मारने की कोशिश करती हैं, तब तक इंसान एक नींद मार के आ सकता है। उनको सिर्फ ग्लैमरस के लिए रखा गया है तब तो ठीक है|

चंकी पांडे के पास और जैकी श्रॉफ के पास करने को ज्यादा कुछ था नहीं लेकिन जैकी श्रॉफ की एंट्री पर जो सीटिया और तालियां बजती है वो यह बताने के लिए काफी है कि जग्गू दादा का क्रेज लोगों में हमेशा रहेगा|

फिल्म का संगीत बहुत बड़ा कमज़ोर पक्ष है। प्यार की मां की, बहन की मां की, टांग उठा के को क्या गाने कहा जा सकता है।

लोकेशन्स कमाल की हैं, वेशभूषा का चयन अच्छे से किया गया है, फिल्मांकन आपको सुकुन पहुचायेगा। विकास शिवरमन की सिनेमैटोग्राफी बेहतरीन है।

कहानी में कोई नयापन नहीं, अपितु इसको ढेर सारी उलझनों के साथ दर्शकों के सामने परोसा गया है। यदि आप अक्षय कुमार और रितेश के फेन है, तो आपको यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए इन् दोनों की कॉमिक टाइमिंग काबिले-तारीफ़ हैं| एक से बढ़कर एक सितारों की मौजूदगी के कारण फिल्म एक बार देखी जा सकती है, क्या पता कौनसा कलाकार आपके चेहरे पर मुस्कान ले आए।

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