Baar Baar Dekho (2016) Film: एक बार ही देख लो वही गनीमत

बार बार देखो भारतीय हिंदी-भाषी रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन नित्या मेहरा (Nitya Mehra) ने किया है, इस फिल्म के ज़रिये निर्देशन के क्षेत्र में उनका बॉलीवुड डेब्यू भी है| करण जोहर (Karan Johar), फरहान अख्तर (Farhan Akhtar) और रितेश सिधवानी (Ritesh Sidhwani) फिल्म के निर्माता है| कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) और सिद्धार्थ मल्होत्रा (Sidharth Malhotra) मुख्य भूमिका अदा कर रहे है, वही ताहा शाह बदुषा (Taaha Shah Badusha), राम कपूर (Ram Kapoor), सयानी गुप्ता (Sayani Gupta) और सारिका (Sarika) सहायक किरदार अदा कर रहे है|

Baar Baar Dekho Movie Review

Baar Baar Dekho (2016) Film Story/Plot

फिल्म की कहानी है बचपन के दोस्त जय वर्मा (सिद्धार्थ वर्मा) और दीया (कटरीना कैफ) की| जय गणित के प्रोफ़ेसर है, नंबर्स से खेलना उनके लिए बाएँ हाथ का खेल है लेकिन प्यार को समझने के मामले में वह काफी कमज़ोर है| दीया एक आर्टिस्ट है जिसको जिंदादिली से जीना पसंद है| उसका सिर्फ एक ही लक्ष्य है….. वह है मिसेज वर्मा बनना! दीया जय के सामने शादी के लिए प्रस्ताव रखती है| हालांकि शादी के वक़्त ही जय वर्मा को विदेश से बेहतर नौकरी का ऑफर आता है| वह बाहर जाना चाहता है, लेकिन दीया के पिता (राम कपूर) जय को विदेश भेजने के लिए तैयार नहीं है| इसी बात पर दीया और जय का झगडा हो जाता है|

जय सुबह नींद से जगता है तो उसकी जिंदगी 10 दिन आगे बढ़ जाती है और वह वाइफ के साथ थाईलैंड में हनीमून मना रहा होता है| दुसरे दिन में वह 2 साल आगे लंदन में पत्नी की डिलेवरी और तीसरे दिन उसकी लाइफ १६ साल आगे बढ़ जाता है| इसके बाद दीया उसे कोर्ट में मिलने बुलाती है, वहा उसे पता चलता है कि दीया उससे तलाक चाहती है| इसके बाद फिल्म की कहानी क्या रहती है, इसके लिए आपको अपने नजदीकी सिनेमाघरों का रुख करना पड़ेगा…|

Baar Baar Dekho Movie Review & Rating

Vella Di Rating: 4.8/10

नित्या मेहरा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बार बार देखो’ में जय वर्मा और दीया वर्मा दर्शकों को यही समझाते दिखेंगे की प्यार निभाना या किसी रिश्ते को बनाए रखना कितना मुश्किल हैं|

जय के किरदार में सिद्धार्थ मल्होत्रा ने ठीक काम किया है| दिया के किरदार में कैटरीना कैफ ने अपने अभिनय से ज्यादा अपनी फिजिक पर काम किया है| बेफिक्र चुलबुली लड़की के किरदार में वह जमी है, लेकिन परफेक्शन का अभाव साफ़ झलकता है| बाकी अन्य सहायक किरदारों ने भी अपने हिस्से के दर्श्यो को ठीक-ठाक निभाया है|

नित्या मेहरा का निर्देशन निराश करता है, उन्होंने अपने कंधो पर भारी-भरकम कहानी ले ली| फिल्म की कहानी श्री राव (Sri Rao) ने लिखी है, जबकि अन्विता दत्त (Anvita Dutt) ने डायलॉग लिखे है| कहानी में नयापन है, लेकिन पठकथा ढीली-ढाली है| फिल्म का फर्स्ट हाफ ठीक-ठाक है, वही इंटरवल बाद पूरी फिल्म बोरियत से भरी हुई है|

फिल्म का संगीत अमाल मलिक (Amaal Mallik), बादशाह (Badshah), बिलाल सईद (Bilal Saeed), अर्को (Arko) और जसलीन रॉयल (Jasleen Royal) ने दिया है| फिल्म का एक गीत “काला चश्मा” जिसको बादशाह, नेहा कक्कर (Neha Kakkar) और अमर अर्शी ने अपने सुर दिए है, काफी लोकप्रिय हो चूका है| नीति मोहन (Neeti Mohan) और अरमान मलिक (Armaan Malik) का गया गीत “सौ आसमान” भी काफी अच्छा है| इनके अलावा “दरिया”, “खो गये हम कहाँ”, “तेरी खैर मंगदी” और “नाचदे ने सारे” बेहतर है| फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी काफी अच्छा है।

रवि के. चंद्रन (Ravi K. Chandran) की सिनेमाटोग्राफी अच्छी है, उन्होंने थाईलैंड, दिल्ली और लंदन तीनों लोकेशन्स को बेहतरीन तरीके से फिल्माया है।

समय यात्रा पर आधारित “बार बार देखो” में इमोशन, रोमांस, ट्विस्ट और कॉमेडी है| साल 1990 से लेकर 2045 की पूरी कहानी…. लेकिन कमी खलती है लचर पठकथा, दमदार स्टारकास्ट, अच्छी एक्टिंग और निर्देशन में पकड़ की| जैसा कि फिल्म का नाम है “बार बार देखो” लेकिन फिल्म देखकर यही कहना चाहूँगा की बार-बार तो रहने दो एक-बार ही देख लो तो ठीक रहेगा|

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