Great Grand Masti (2016) Movie Review: मस्ती नदारद, कॉमेडी के नाम पर सिर्फ फूहड़ता!

निर्देशक इंद्र कुमार “मस्ती फिल्म सीरीज” की तीसरी फिल्म “ग्रेट ग्रैंड मस्ती” के साथ दर्शकों का मनोरंजन कर पाने में इस बार नाकामयाब रहे है| इस सीरीज की पिछली दोनों फिल्में मस्ती (2004) और ग्रैंड मस्ती (2013) ने दर्शकों के मनोरंजन के साथ-2 बॉक्स-ऑफिस पर भी सफलता प्राप्त की थी| लेकिन इस बार कमज़ोर और अनोखी कास्टिंग, मूवी का रिलीज़ से पहले ही ऑनलाइन लीक होना और कहानी की नदारदता, क्या वाकई में ये फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों में खिंच पाने में सक्षम है? आइये समीक्षा करते है….!!

Great Grand Masti Movie Review

Bollywood Film – Great Grand Masti (2016) Movie Story

फिल्म की कहानी तीन दोस्तों अमर सक्सेना (Ritiesh Deshmukh), मीत मेहता (Vivek Oberoi) और प्रेम चावला (Aftab Shivdasani) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हमेशा अपनी लाइफ में मस्ती करना चाहते है। फिल्म के टाइटल ट्रैक से फिल्म शुरू होती है और तीनों की शादी के बाद फिल्म की कहानी 6 वर्ष बाद शिफ्ट हो जाती है| तीनों दोस्त अपनी अपनी-2 साधारण लाइफ जी रहे होते हैं और अपनी शादीशुदा जिंदगी में वाइफ के होते हुए भी खुश नहीं हैं। ऐसे में तीनों दोस्त गाँव की गौरियों के साथ मस्ती करने के लिए दूध-वाड़ी नाम के गाँव में जाते है| वहां, ये तीनों एक हवेली में रहते हैं, जहां इन्हें मिलती है रागिनी (Urvashi Rautela).. जो कि एक वर्जिन भूतनी होती है| फिर सिलसिलेवार घटनाक्रम में कई सारे उतार चढ़ाव आते हैं| अब ये तीनों दोस्त इस भूतनी से कैसे अपनी जान बचाते है और इन्हें कैसे अपनी पत्नियों की कद्र होती है…. यह देखने के लिए आपको अपने नजदीकी सिनेमाघरों का रुख करना पड़ेगा|

Great Grand Masti (2016) Movie Review & Rating

Vella Di Rating: 2.5/10

ना ग्रेट है, ना ग्रैंड है और ना ही मस्ती है! सिर्फ कॉमेडी और मस्ती के नाम पर फूहड़ता को इस फिल्म में परोसा गया है| जहा तक फिल्म की कहानी और पटकथा की बात की जाए तो यह इस फिल्म का सबसे कमज़ोर हिस्सा है| फिल्म की कहानी तुषार हीरानंदानी ने लिखी है और पटकथा मधुर शर्मा और आकाश कौशिक ने और तीनों ही अपने काम में पूरी तरह फ्लॉप रहे है|

फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी सुस्त और ढीला है वही इंटरवल बाद का हिस्सा तो पूरी तरह से हिला डुला हुआ है| इसके अलावा फिल्म की बेमेल कास्टिंग, कमज़ोर संवाद ने भी फिल्म को पूरी तरह बोरियत से भर दिया| इंद्र कुमार (Indra Kumar) का निर्देशन भी कुछ खास नहीं हैं| निगम बोमज़ं की सिनेमाटोग्राफी सामान्य है|

अभिनय की बात की जाए तो रितेश देशमुख दर्शकों को थोडा बहुत हँसाने में कामयाब रहे है, उनके अलावा अन्ताक्षरी बाबा के किरदार में संजय मिश्रा (Sanjay Mishra) और रितेश की सास के किरदार में उषा नदकरिणी (Usha Nadkarni) जी ने बेहतर काम किया है| विवेक ओबेरॉय और आफताब शिवदसानी का अभिनय औसत ही रहा| यहां यह बताना काफी अहम् है कि मस्ती फिल्म सीरिज की बाकी दो फिल्मों की तरह यहां इनकी ट्यूनिंग थोड़ी कम दिखी। इनके अलावा उर्वशी रौतेला एक भूत के किरदार में हंसी की पात्र बनकर रह गयी, उनके पास सिर्फ ग्लैमरस के अलावा अभिनय के लिए कुछ था भी नहीं|

पूजा बोस (Pooja Bose), मिष्टी (Mishti) और श्रद्धा दास (Shraddha Das) के पास करने को कुछ ज्यादा नहीं था| लिहाजा, उनकी एक्टिंग पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। इनके अलावा बाबु रंगीला के किरदार में श्रेयस तलपडे (Shreyas Talpade), रामसे के किरदार में सुदेश लहरी (Sudesh Lehri) और शिने के किरदार में सोनाली राउत (Sonali Raut) ने भी स्पेशल अपीयरेंस दी है| फिल्म की कहानी और पटकथा में जो कमी थी उसके कारण अभिनय भी बदतर ही रहा, हालांकि कास्टिंग और भी बेहतर हो सकती थी|

फिल्म का संगीत संजीव-दर्शन (Sanjeev-Darshan), शारिब-तोषी साबरी (Shaarib & Toshi Sabri) और शान (Shaan) ने दिया है। फिल्म में 4 गाने है- तेरी कमर को, आई वाना तेरा इश्क, रेशम का रुमाल और लिपस्टिक लगा के! सभी गाने औसत है और शायद ही कोई गाना आपके मुंह पर चढ़ेगा।

फिल्म की कहानी ही नहीं, बल्कि अभिनय के मामले में भी ग्रेट ग्रैंड मस्ती आपको बोर करेगी|

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