Half Girlfriend (2017) Movie Review: दोस्त से थोड़ी सी ज्यादा मगर गर्लफ्रेंड से काफी कम

हाफ गर्लफ्रेंड (Half Girlfriend) एक भारतीय रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जोकि चेतन भगत के उपन्यास “हाफ गर्लफ्रेंड” पर आधारित हैं| इस फिल्म का निर्देशन मोहित सूरी ने किया है, और मुख्य किरदारों में अर्जुन कपूर और श्रध्दा कपूर है| चेतन भगत के नावेल पर आधारित ये पांचवी बॉलीवुड फिल्म (Bollywood Film) है, इससे पहले थ्री इडियट्स, काई पो छे!, टू स्टेट्स और हेल्लो मूवीज बन चुकी हैं|

Half Girlfriend (2017) Film Plot / Story

अगर आपने चेतन भगत का नावेल “हाफ गर्लफ्रेंड” पढ़ा है तो आप पहले से ही फिल्म की कहानी से रूबरू होंगे|

फिल्म की कहानी माधव झा (Arjun Kapoor) के किरदार से शुरू होती है, जो कि पटना, बिहार के एक छोटे से कस्बे से आगे की पढाई के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफन कॉलेज में दाखिला लेने आता है| लेकिन कमज़ोर अंग्रेजी के चलते उसको काफी परेशानी होती है, परन्तु खेल कोटे से उसका दाखिला हो जाता हैं|

वही माधव की मुलाकात होती है रिया सोमानी (Shraddha Kapoor) से जो कि अमीर परिवार से ताल्लुक रखती है और कान्वेंट स्कूल में पढ़ी-लिखी है, जिसकी अंग्रेजी की पकड़ शानदार है| रिया को बारिश, बास्केटबाल और सिंगिंग पसंद है|

Half Girlfriend Movie Review

माधव और रिया दोनों समाज के अलग-2 परिवेश से आते है पर फिर भी दोनों के बीच दोस्ती हो जाती है, जिसका कारण है दोनों का बास्केटबाल कनेक्शन| दोनों की कॉलेज लाइफ हँसते-खेलते आगे बढती हैं|

फिर ज़ाहिर सी बात है लड़का और लड़की दोस्त नहीं रह सकते उनका प्यार में पड़ना लाज़मी हैं और वही होता है| शैलेष (Vikrant Massey) जोकि माधव का दोस्त है, उसको समझता है कि वो जिस रास्ते पर चल रहा है, वो एकतरफा है, लेकिन माधव तो ठहरा प्यार में पागल वो उसकी नहीं सुनता और आगे बढ़ता है|

माधव इस दोस्ती को शादी के अंजाम तक पंहुचाना चाहता हैं, लेकिन रिया कहती है की वो उसकी “हाफ गर्लफ्रेंड” है| अब यहाँ आपको हाफ गर्लफ्रेंड (Half Girlfriend) का मतलब बताते हैं – दोस्त से थोड़ी सी ज्यादा मगर गर्लफ्रेंड से काफी कम| ये ठीक वैसा ही है जैसे “साली आधी-घरवाली“|

इसके बाद माधव को उसके दोस्त उकसा देते है कि वो रिया के प्यार का इम्तिहान लें और वो सीमाएं पार करता है और रिया से कहता है “देती है तो दे वरना कट ले” और लगभग उसको परेशान करता हैं|

इसके बाद दोनों के रिश्ते में दरार आती है और रिया अपने बचपन के दोस्त रोहन के साथ अपनी जिंदगी गुजारने का फैसला लेती हैं…..!!

इसके बाद काफी सारे कहानी में रोचक उतार-चढ़ाव आते हैं, उसके लिए आपको नजदीकी सिनेमाघरों में अपनी दोस्त, हाफ गर्लफ्रेंड, फुल गर्लफ्रेंड या फिर बीवी के साथ पॉपकॉर्न और कॉफ़ी का लुफ्त लेकर फिल्म का मज़ा लीजिये या चेतन भगत का नावेल पढ़ लीजिये, जो भी आपको ठीक लगे|

Half Girlfriend (2017) Movie Review & Rating

Vella Di Rating : 4.3/10

फिल्म की कहानी बैंकर से लेखक और फिर निर्माता चेतन भगत (Chetan Bhagat) के नावेल “हाफ गर्लफ्रेंड” पर आधारित है, जिसको कुछ खासा पसंद नहीं किया गया था| कहानी में कुछ नयापन नहीं हैं, ऐसा कई बार हुआ है कि लड़का प्यार करता हुआ रह जाता है और लड़की कहानी में उसे छोड़कर दुसरे की हो जाती हैं, थोड़े समय बाद दोनों की राहें फिर मिलती है| पिछले शुक्रवार को परिणीति चोपड़ा (Parineeti Chopra) और आयुष्मान खुर्राना (Ayushmann Khurrana) अभिनीत “मेरी प्यारी बिंदु” (Meri Pyaari Bindu) में भी ऐसा हुआ था और फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर कुछ खास कर नहीं पायी|

मोहित सूरी (Mohit Suri) निर्देशक के तौर पर इस बार प्रभावित नहीं कर पाये| फिल्म की पठकथा लचर है और दर्शकों को अपने से जोड़ नहीं पाती है, बोरियत का अहसास कराने लगती है|

अब बात करते है किरदारों के अभिनय की तो अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) बहुत ही मंझे हुए कलाकर है, लेकिन उनकी भाव-भंगिमाओं, तौर-तरीकों और चाल-ढाल में इस कदर शहरीपन समाया हुआ है कि वो किसी भी लिहाज से “बिहारी” के तौर पर फिट नहीं बैठते है और बिहारी एक्सेंट वाली हिंदी बोलते देखना सबसे वाहियात मजाक लगता हैं|

श्रध्दा कपूर (Shraddha Kapoor) अपने फ्रेंच और इंग्लिश ज्ञान के कारण भले ही इस किरदार को सूट करती हो, लेकिन श्रध्दा ने इस फिल्म में वही किया है, जो वो अपनी हर फिल्म में करती आई है, अपनी आईलैस हाईलाइट करना और गिटार लेकर बहुत ही बुरी तरह से अंग्रेजी गानों पर लिप-सिंक करना| श्रद्धा प्‍यारी लगी हैं, लेकिन यहां उनमें आकर्षण कम है।

माधव के दोस्त शैलेष के किरदार में विक्रांत मेसी (Vikrant Massey) का अभिनय आपको जरूर याद रह जाता है| वही, रेहा चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) अपने छोटे से किरदार में ठीक ठाक है| माधव की माँ के छोटे मगर दमदार किरदार में सीमा विस्वास (Seema Biswas) ने अपना बेहतरीन अभिनय किया हैं|

ईशिता मोइत्रा उधवानी (Ishita Moitra Udhwani) ने फिल्म के डायलॉग (Dialogues) काफी पुराने और वाहियात लिखे हैं, जैसे कि –

“हार मत मानो, हार को हराना सीखो”

“कुछ चीजें ऐसी टूटती है कि उनका दोबारा जुड़ना संभव नहीं होता..सिर्फ दरारें रह जाती है”

“देती है तो दे वर्ना कट ले”

फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी है इसके गीत और संगीत, जिसमे ऐश किंग और शाशा तिरुपति का गाया “बारिश, श्रेया घोषाल (Shreya Ghoshal) और फरहान सईद का “थोड़ी देर” और अरिजीत सिंह (Arijit Singh) का “फिर भी तुमको चाहूँगा” गाने काफी अच्छे है| लेकिन फिल्म में इंग्लिश गाने भी है, जो कर्णप्रिय नहीं है| राजू सिंह (Raju Singh) ने मोहित सूरी की पिछली सभी फिल्मों का बैकग्राउंड स्कोर दिया है, यहाँ पर भी अच्छा काम किया हैं|

विष्णु राव (Vishnu Rao) की सिनेमेटोग्राफी काबिले-तारीफ़ हैं, लेकिन देवेंद्र मुर्देश्वर (Devendra Murdeshwar) ने एडिटिंग में काफी निराश किया हैं, इसको बेहतर किया जा सकता था| दिल्ली, पटना और न्यूयॉर्क के काफी सीन्स में गज़ब का कैमरा वर्क नज़र आता हैं|

फिल्म का क्लाइमैक्स न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वेयर पर फिल्माया गया है, जो कि आँखों को सुकून देने वाला हैं|

फिल्म में “बेटी बचाओ बेटी पढाओ” और स्कूलों में लडकियों के लिए शौचालय होने चाहिए जैसे मुद्दों के ज़रिये सामाजिक संदेश भी दिया गया हैं|

“हाफ गर्लफ्रेंड” (Half Girlfriend) मूवी को देखने या ना देखने का फैसला आप स्वयं करे, तो मेहरबानी होगी….!!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *