Loveshhuda (2016) Movie Review and Rating – Loveshuda Film

अगर कोई इंसान दिल से खुश ना हो तो उसका फर्क उसके चेहरे पर साफ़ दिख जाता है और वह जिससे प्रेम करे उसके साथ उसका खुश रहना जरूरी है| विज्ञापन की दुनिया से फिल्म लेखक-निर्देशक बने वैभव मिश्रा ने लवशुदा फिल्म के जरिये यह बात दर्शाने की कोशिश की है|

Girish Kumar & Navneet Kaur Dhillon Starrer Loveshhuda (2016) Film Story

फिल्म की कहानी गौरव मेहरा (गिरीश कुमार) की जिंदगी की है, उसकी बड़ी बहन गरिमा त्रेहान (टिस्का चोपड़ा) उसको लेकर कुछ ज्यादा ही प्रोटेक्टिव है और उसकी जिंदगी के ज्यादातर फैसले वही करती है| यहाँ तक की उसकी शादी भी वही फिक्स कर देती है जो आगे चलकर गौरव के लिए घुटन की मुख्य वजह बन जाती है| गौरव मेहरा की शादी की तैयारियां जोरों से चल रही है वही गौरव अपने दोस्तों के साथ बेचलर पार्टी के लिए पब में जाता है और नशे की हालत में उसकी मुलाकात पुजा (नवनीत कौर डिल्लन) से होती है| पुजा के साथ बिताए कुछ लम्हों में गौरव अपनी दिली-खवाहिशे उसके साथ शेयर करता है और उसकी सच्चाई, सादगी और भावनाओं के आवेश में दोनों बह जाते है और हम-बिस्तर हो जाते है|

Loveshuda Movie Review 2016

समाज, बहन और दुविधा के चलते गौरव शादी कर लेता है, लेकिन बेमन से की गयी शादी ज्यादा टिकती नहीं है और फिर गौरव को पुजा की याद आती है| कहानी लंदन से शुरू होकर दिल्ली और शिमला में पहुचती है| पुजा के साथ अन्य किरदारों को भी कहानी में जोड़ा गया है, जो फिल्म के अंतिम हिस्से में आते है| आगे की कहानी जानने के लिए आपको अपने नजदीकी सिनेमाघरों का रुख करना पड़ेगा|

Loveshhuda (2016) Movie Review and Rating

Vella Di Rating: 4.2/10

फिल्म की कहानी में कुछ नयापन है तो बाकी सारा वही पुराना घिसा-पिटा बॉलीवुड फार्मूला जिसके कारण फिल्म काफी जगह बोझिल लगने लगती है| फिल्म में गिरीश कुमार ने ठीक-ठाक अभिनय किया है, डांस पहले से बेहतर है लेकिन अभी भी थोड़ी और मेहनत की जरुरत है| वही नवनीत कौर डिल्लन की यह बॉलीवुड डेब्यू फिल्म है और उनके अभिनय में ताजगी और सादगी होने के साथ-2 उनकी दिलकश मुश्कान आपका मन मोह लेगी| वही गौरव की बहन के किरदार में टिस्का चोपड़ा ने दमदार अभिनय किया है| सचिन खेडेकर के पास ज्यादा कुछ खास नही था| नवीन कस्तूरिया और सावंत सिंह प्रेमी ने भी सराहनीय काम किया है|

परिचय और मिथुन का संगीत ठीक-ठाक है और “मर जायें” और “पीने की तमन्ना” गाने पहले से ही युवाओं में काफी लोकप्रिय है| खुबसूरत सिनेमेटोग्राफी के लिए बिजीतेश डे बधाई के पात्र है|

फिल्म को रोचक बनाने के लिए जरूरी चीजों का ध्यान रखा गया है, लेकिन फिल्म में काफी सारी खामियाँ है, जिसके कारण फिल्म पूरी तरह से दर्शकों को बांधने में नाकाम रहती है| जैसे निर्देशक ने नायक और नायिका की जिंदगी में शादी से पहले कुछ घटनाक्रम एक-सा ही दिखाया है| इंटरवल पहले तक फिल्म ठीक ठाक रहती है लेकिन उसके बाद आप टिपीकल हिंदी फिल्मों की तरह आसानी से आगे की कहानी का कयास लगा सकते है| जैसे, नायक नायिका का अचानक से मिलना, नायिका द्वारा नायक को जिंदगी से दूर जाने के लिए कहना, हीरो के द्वारा अपनी प्रेमिका के लिए हद से गुज़र जाना अब बहुत पुराना फार्मूला हो गया है और दर्शकों को बोर करने लगा है| लवशुदा फिल्म (Loveshuda film) की कहानी इंटरवल पहले थोड़ी दिलचस्प है लेकिन उसके बाद इसको बर्दाश्त करना मुश्किल होगा|

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