Parched (2016) Film: दमदार विषय और जीवंत अभिनय के साथ मुद्दों पर आधारित मूवी

पार्च्ड फिल्म में महिलाओं के यौन-शोषण के साथ-साथ पुरुष-प्रधान समाज में आज भी महिलाओं को भोग और उपयोग की सोच के नजरिये को बेहद ही बोल्ड अंदाज़ में पेश किया हैं| इस फिल्म का विषय नया नहीं है, इस फिल्म से पहले महिलाओं के यौन-शौषण और उन्हें पुरुष-प्रधान समाज में प्रताड़ित करने को लेकर कई फिल्में बन चुकी हैं| इस फिल्म को अभी तक 24 इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाया गया है, जिसमें से 18 बार इसे अवार्ड्स से सम्मानित भी किया गया है|

बस एक चीज़ अखरती है इतने संजीदा विषय को साफ़-सुथरे तरीके से भी दर्शकों के सामने रखा जा सकता था| हर दुसरे-तीसरे दर्शय में भद्दी गालियों और जमकर परोसे गए हॉट सीन्स बेशक कहानी की मांग हो सकते है, लेकिन इनके कारण एक खास वर्ग ही इस मूवी से जुड़ पायेगा|

Parched Movie Review 2016

Bollywwod Drama Film Parched (2016) Story

पार्च्ड की कहानी भारत के उत्तर-पश्चिमी इलाके कच्छ, गुजरात में कही दूर-दराज़ बसे एक छोटे से गाँव से शुरू होती है| फिल्म की कहानी का केंद्र बिंदु चार महिलाएं है:- रानी (Tannishtha Chatterjee), लाज्जो (Radhika Apte), बिजली (Surveen Chawla) और जानकी (Lehar Khan)!

रानी के पति की एक्सीडेंट की वजह से मौत हो चुकी है, जिसकी वजह से वो कम उम्र में विधवा हो जाती है और अपने बेटे गुलाब सिंह (Riddhi Sen) और सास के साथ रहती है| रानी अपने बेटे की शादी करना चाहती है ताकि उसके वीरान घर में बहु आ सके और गुलाब भी सुधर सके और घर की जिम्मेदारियों का बोझ उठाए| रानी अपने बेटे की शादी पास के गाँव की लड़की जानकी से कर देती है| जानकी अभी स्कूल में पढ़ रही है और शादी से बचने के लिए उसने अपने बाल काट लेती है, लेकिन इसके बावजूद उसकी शादी गुलाब से हो जाती है| गुलाब उसके छोटे बालों और दोस्तों की गलत संगत के कारण जानकी को नापसंद करता है और उसके साथ मारपीट करता है| रानी कुछ नहीं कर पाती बस वो चुपचाप यह सब सहन करती रहती है|

वही दुसरी तरह रानी की सहेली लाज्जो को उसका शराबी पति मनोज बाँझ समझता है और उसके साथ हर रोज़ मारपीट करता है| रानी और लाज्जो गाँव के एक स्थानीय उद्यमी किशन (Sumeet Vyas) के लिए काम भी करती है और अपनी वित्तीय कठिनाइयों से निकलने की भी जहोजद्द में रहती है|

बिजली एक स्थानीय कामुक नर्तकी है, जो गांव के पुरुषों की आंखों के लिए एक दावत है। वह नृत्य के साथ-2 गांव के कई लोगों की आंतरिक इच्छाओं को भी पूरा करती है| रानी, लज्जो और बिजली आपस में दोस्त हैं और एक-दूसरे से मिलकर अक्सर अपने दुख-दर्द बांटा करती है| साथ ही साथ ये प्यार, सेक्स और अपने भविष्य के सपनों के बारे में बातें साँझा करती है|

कहानी के रोचक मोड़ तब आता है जब रानी को अहसास होता है कि उसने जानकी की जिंदगी ख़राब कर दी अपने बेटे के साथ शादी करके, लाज्जो अपने पति की प्रतिदिन की क्रूरता से थक चुकी थी और बिजली की जगह एक नई लड़की ने ले ली थी| पुरुष प्रधान समाज में हर रोज़ शोषित और कुचली जा रही इन चारों महिलाओं को मर्दों से नफरत है, इन चारों का मकसद पुरुषों की कैद से छुटकारा और उनसे मिलने वाली प्रताड़ना से मुक्ति प्राप्त करना है।

Parched Movie Review and Rating

Vella Di Rating: 7.5/10

पार्च्ड फिल्म मुख्यतः पुरुष प्रधान समाज की उसी ओछी मानसिकता को दर्शाती है, जो सिर्फ महिलाओं को अपने पैर की जुती समान समझते है, जिनके लिए महिलायें सिर्फ भोग-विलासिता की वस्तु के समान है| जिसको वो अपने मन-मुताबिक रोंदते और कुचलते रहते है|

फिल्म का लेखन और निर्देशन का काम लीना यादव (Leena Yadav) ने संभाला है|जबकि फिल्म का निर्माण अजय देवगन (Ajay Devgan) ने अपने घरेलू बैनर अजय देवगन फिल्म्स के तहत किया है| पार्च्ड फिल्म के अलावा लीना ने ऐश्वर्या राय और संजय दत्त अभिनीत “शब्द” और अमिताभ बच्चन अभिनीत “तीन पत्ती” बॉलीवुड फिल्मों का भी निर्देशन किया है|

फिल्म की कहानी अलग तरह की है और पठकथा बहुत ही तेज़ कटार की तरह है जो बहुत सारे मुद्दों की और ध्यान खींचती है, जैसे बाल विवाह, पारिवारिक बलात्कार, पंचायती राज, वित्तीय कठिनाइयाँ, पुरुष प्रधानता और महिलाओं का शोषण और घरेलू अत्याचार| कहीं-कहीं पठकथा खिंची हुई सी लगती है| कहानी के कुछ किरदारों को पूरी तरह भूमिका में नहीं उतार पाये| फिल्म में कुछ इंटिमेट सीन भी है, जिनको दर्शाने का डंग काफी अलग है, जिससे ये सीन्स कहानी की मांग नज़र आते है| फिल्म में भद्दी गालियों की भरमार है, लेकिन लीना की तारीफ़ करनी होगी की उन्होंने इन सबको कहानी का हिस्सा बनाकर पेश किया|

फिल्म के मुद्दे इसकी कमज़ोर कड़ी हो सकते है, क्योंकि हिंदी फिल्म देखने वाले दर्शकों के लिए ये मुद्दे नए नहीं है, बस फिल्मांकन अलग तरह से किया गया है, जिसके कारण खास तरह की ही ऑडियन्स ही सिनेमाघरों तक पहुचे| फिल्म के क्लाइमैक्स पर मेहनत की जाती तो यकीनन यह फिल्म एक ठोस और नए मेसेज के साथ समाप्त होती।

रानी के किरदार में तनिष्ठा चटर्जी ने दमदार अभिनय से अपने किरदार को जीवंत कर दिया| लाज्जो के किरदार में राधिका आप्टे ने बेशक बोल्ड सीन्स किये है, लेकिन यह सीन्स उनके किरदार की मांग थी| खूबसूरत बोल्ड बिंदास बिजली के किरदार में सुरवीन चावला ने अपने किरदार के साथ पूरी तरह से न्याय किया है| कम उम्र में शादी होने के बाद अपने पति द्वारा प्रताड़ित होती जानकी के किरदार में लहर खान ने काफी मेहनत की है| इनके अलावा अन्य सहायक कलाकारों ने भी अपने छोटे रोल पूरी ईमानदारी और सहजता से निभाये है| सभी किरदारों का अभिनय वास्तविकता के करीब लगता है| वहीं एक छुपे हुए प्रेमी का छोटा रोल एक्टर आदिल हुसैन (Adil Hussain) ने किया है, जो कहानी की रफ्तार में अहम योगदान देता है|

फिल्म का संगीत माहौल के हिसाब से सटीक है, फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर दिलचस्प है, जो सीन्स के साथ बेहतरीन लगता है, इसके लिए हितेश सोनिक (Hitesh Sonik) की तारीफ़ की जानी चाहिए| फिल्म में लोक-गीतों और लोक संगीत का समावेश है|

सिनेमैटोग्राफर रसेल कारपेंटर (Russell Carpenter) ने कमाल की सिनेमाटोग्राफी की है, जिनका मैजिक टच आपको काफी सीन्स में देखने को मिलेगा| रसेल ने हॉलीवुड फिल्म “टाइटैनिक” के लिए अकैडमी अवॉर्ड भी जीता था|  केविन टेंट (Kevin Tent) ने एडिटिंग में अपना बेस्ट दिया है|

पार्च्ड एक बेहद शानदार मूवी है, अलग कहानी, पठकथा कहने का बोल्ड अंदाज़, जीवंत भरा अभिनय और शानदार निर्देशन के साथ ही साथ कर्णप्रिय संगीत और दिल को छु लेने वाली सिनेमाटोग्राफी| इन सबके अलावा सामाजिक मुद्दों को बेहद ही संजीदगी से दर्शकों के सामने रखा गया है| साफ़-सुथरी फिल्मों के शौकीन लोगों को सेंसर बोर्ड से फिल्म को मिला एडल्ट सर्टिफिकेट उनको “पार्च्ड” से दूर करेगा। यदि आप मुद्दों पर आधारित सिनेमा पसंद करते हो तो यह फिल्म आपके लिए है|

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *