Prakash Jha and Priyanka Chopra Starrer Jai Gangaajal (2016) Movie Review and Rating

प्रकाश झा की प्रियंका चोपड़ा स्टारर “जय गंगाजल” फिल्म आज सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है| जय गंगाजल रिलीज़ से पहले बिहार के विधानसभा क्षेत्र बांकीपुर को लेकर विवाद में रही, क्यूंकि फिल्म में बांकीपुर के विधायक को नेगेटिव किरदार में दिखाया गया है, इस से यह संदेश जायेगा की वहां का वर्तमान विधायक भ्रष्ट है| भारतीय सिनेमा में फिल्मकारों को अब से अपनी काल्पनिक कहानियों में किरदारों और शहरों के नाम भी काल्पनिक सोचने पड़ेंगे ताकि कोई विवाद ना हो|

जय गंगाजल एक इंडियन हिंदी एक्शन ड्रामा फिल्म है जिसका लेखन और निर्देशन प्रकाश झा ने किया है और निर्माण प्रकाश झा और मिलिंद दबके ने किया है| यह फिल्म 2003 में अजय देवगन अभिनीत “गंगाजल” का सीक्वल है| इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा ने मुख्य किरदार अदा किया है, जबकि मानव कौल, प्रकाश झा, राहुल भट और क्वीन हरीश ने सहायक किरदार अदा किये है| फिल्म का संगीत सलीम-सुलैमान ने दिया है और सिनेमेटोग्राफी सचिन कृष्ण ने की है|

Jai Gangaajal Movie Review 2016

Prakash Jha and Priyanka Chopra Starrer Jai Gangaajal (2016) Film Story

प्रकाश झा की बॉलीवुड फिल्म “जय गंगाजल” मघ्य प्रांत के एक क्षेत्र की कहानी है, जहां पर आईपीएस पुलिस अधिकारी आभा माथुर (प्रियंका चोपड़ा) की नियुक्ति होती है, उनको यहाँ मुख्यमंत्री की पसंद से भेजा जाता है। आभा माथुर का जहां पर नियुक्ति होती है उस क्षेत्र में भ्रष्टाचार और कानून तोड़ने वाले लोगो की भरमार होती है| इसलिए आते ही वह घोषणा करती है कि “मैं यहाँ टेबल-कुर्सी पर बैठकर सलामी ठुकवाने नहीं आई हूँ|” इसके आगे अपनी बात ज़ारी रखती हुयी वह कहती है “आजकल समाज में उसकी इज्ज़त होती है, जो कानून को तोड़ता है, लेकिन मैं उसकी इज्ज़त करती हूँ, जो कानून तोड़ने वाले को तोड़ता है|”

आभा माथुर को चालू सर्किल बाबु भोलानाथ सिंह जैसे लोगो के साथ काम करना है जो हर हाल में अपना काम निकलवाना जानते है, लेकिन हिम्मत और जज्बे से ओतप्रोत आभा अपने सच्चे इरादे ज़ाहिर कर देती है और भोलानाथ को बताती है कि “कीचड़ धोने के लिए साफ़ पानी की जरुरत होती है नाकि गंदे पानी की|”

निर्देशक प्रकाश झा की “जय गंगाजल” उनकी परिचित शैली और सिनेमाई भाषा की राजनीतिक-सामाजिक फिल्म है, जिसका प्रस्थान आधार उनकी ही 2003 की अजय देवगन अभिनीत फिल्म “गंगाजल” है| जहां एक और “गंगाजल” अपराध से त्रस्त एक ऐसे समाज और पुलिस ऑफिसर की कहानी थी जो भीड़ के न्याय की दुविधा से ग्रस्त था, वही “जय गंगाजल” में आभा माथुर भीड़ के न्याय का विरोध करती है और कानून के दायरे में ही भ्रष्ट राजनीतिज्ञों को सजा दिलवाने में यकीन रखती है|

अपने कर्तव्य निर्वहन में वह अपने कथित संरक्षक की चेतावनी को भी नज़रंदाज़ कर देती है, जिसके कारण ऐसी स्थिति आ जाती है कि उसको अकेले ही कठिनाइयों से जूझना पड़ता है, लेकिन फिर भी वह हिम्मत नहीं हारती है और अपनी ईमानदारी और सच्ची निष्ठा से भोलेनाथ सिंह जैसे भष्ट सर्किल बाबु का भी ह्रदय परिवर्तन कर देती है और उसके साथ ही समाज का समर्थन भी हासिल करने में कामयाब होती है|

“जय गंगाजल” आभा माथुर की सच्ची निष्ठा और ईमानदारी था भ्रष्ट सर्किल बाबु भोलेनाथ सिंह के द्वंद को लेकर चलती है| इसमें बबलू पांडे और डब्लू पांडे जैसे बाहुबली नेता भी है, जिनका मानना कि इस बांकीपुर में ऊपर-नीचे, दांए-बाँए सब उनके इशारे पर ही होता है| चार बार से बबलू पांडे विधायक चुने जा चुके है और उसको लगता है कि आगे भी वही विधायक चुना जायेगा| लेकिन आभा माथुर उसके भ्रम और दंभ को चकनाचूर कर देती है|

Jai Gangaajal (2016) Movie Review and Rating

Vella Di Rating: 5.2/10

फिल्म एक जबरदस्त शुरूआत करती है मानव कौल के साथ, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढती है, वैसे-वैसे एक के बाद एक समस्याओ से उलझती जाती है| फिल्म में मुद्दे ज्यादा हो जाने से फिल्म का पता ही नहीं चलता| इसके अलावा देखा जाए तो फिल्म आज के समय से काफी पीछे है और उसके साथ ही वास्तविकता से भी कोसों दूर है| फिल्म में हर मुद्दा दुसरे से जुड़ने के बजाय उलझता जाता है और और कुछ देर बाद कहानी समझ नहीं पाती की आखिर सुलझी बात कही कैसे जाये|

फिल्म में प्रियंका चोपड़ा का खाकी अवतार दर्शकों को पसंद आयेगा और एक पुलिस अधिकारी के रूप में जोशीला अभिनय भी किया है| कुछ जगह उनको ज़ोरदार संवाद मिले है, जिनको बखूबी निभाया है और उनके एक्शन दर्श्यो में कोई झिझक और डर नहीं हैं| लेकिन फिल्म की लचर कहानी और पठकथा को सँभालने और उठाने की पूरी कोशिश करती हुई दिखती है, जिसमें कुछ जगह वह सफल हुई है तो कुछ जगह बुरी तरह असफल| दबंग और सिंघम के बीच आभा माथुर खोयी हुई सी लगती है|

फिल्म में प्रकाश झा ने लेखन, निर्देशन, निर्माण के साथ-साथ अभिनय में भी हाथ आजमाया है, जिसकी कोई जरुरत नहीं थी, उनका ग्रे-शेड आप पर कोई छाप नहीं छोड़ेगा| उन्होंने किरदार में ढलने और रोचक बनाने की कोशिश जरुर की है, लेकिन उनका कैमरे के सामने काफी दर्श्यो में संकोच ज़ाहिर होता है| “उनका गंदा है पर धंधा हैं” ये वाला एटीट्यूड आप बस नज़रंदाज़ करना चाहेंगे| प्रकाश झा को फिल्म की कहानी और पठकथा पर ध्यान देना चाहिए था, ऐसा लगता है जैसे फिल्म की कहानी पर काफी समय से काम नहीं किया गया हो| निर्देशन में भी इस बार कोई कमाल नहीं दिखा पाये|

फिल्म में मानव कौल ने अपने शानदार अभिनय से जरुर दर्शकों का दिल जीता है, उनके लिए कहा जा सकता है कि बॉलीवुड फिल्मों को एक ऐसा खलनायक मिला है, जो चिल्लाता और भयानक चेहरा नहीं बनता, उसकी करतूते नहीं मालूम हो तो वह सभ्य और नेकदिल लग सकता है|
इस फिल्म के अन्य सह-कलाकारों मुरली शर्मा, राहुल भट, निद कामथ, शक्ति सिन्हा, वेगा टमोटिया और प्रणय नारायण आदि ने भी उल्लेखनीय काम किया है|

फिल्म के डायलॉग्स में कोई नयापन नहीं है। वो वही हीरोगिरी की बातें करते हैं जो आज के दर्शक पचा नहीं पाएंगे। पिछली बार की गंगाजल की बजाय इस बार फिल्म के संगीत पर काफी ध्यान दिया गया है, लेकिन फिर भी ये कहीं-2 कहानी को तोड़ते है और उसको जुड़ने नहीं देते है| प्रियंका चोपड़ा “जय गंगाजल” फिल्म की जान है और यदि आप पीसी के फैन है तो आप यह मूवी देख सकते है|

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