Rustom (2016) Movie Review: इमोशन, ड्रामा, सस्पेंस और अक्षय कुमार की बेहतरीन अदाकारी का लाजवाब मिश्रण

नीरज पाण्डेय की फिल्म ‘रुस्तम’ एक वास्तिवक जीवन की सच्ची घटना पर आधारित हैं, जिसमें खूब सारा एक्शन, ड्रामा, इमोशन और सस्पेंस हैं। स्पेशल 26 और बेबी जैसी ब्लॉकबस्टर फ़िल्में करने के बाद एक बार फिर अक्षय कुमार और नीरज पाण्डेय (Neeraj Pandey) साथ में “रुस्तम” जोकि एक रोमांटिक क्राइम थ्रिलर फिल्म लेकर दर्शकों से रूबरू हुए हैं। लेकिन वो इस बार फिल्म का निर्देशन नहीं कर रहे है बल्कि निर्माता के तौर पर फिल्म से जुड़े है, निर्देशन का जिम्मा टीनू देसाई को सौंपा गया है। इस साल अक्षय कुमार की 2 फिल्में “एयरलिफ्ट” और “हाउसफुल 3” रिलीज़ हो चुकी है जो बॉक्स-ऑफिस पर सुपरहिट होने के साथ ही दर्शकों और क्रटिक्स के द्वारा भी काफी सराहा गया था| रुस्तम फिल्म का मुकाबला ह्रितिक रोशन स्टारर “मोहंजो दरो” से भी है|

Rustom Movie Review 2016

नानावटी केस पर रुस्तम फिल्म से पहले 2 मिलती-जुलती फिल्में और बन चुकी है, जिसमे वर्ष 1963 में आई सुनील दत्त (Sunil Dutt) और लीला नायडू (Leela Naidu) अभिनीत “Yeh Rastey Hain Pyar Ke” और वर्ष 1973 में आई विनोद खन्ना (Vinod Khanna) और लिली चक्रवर्ती (Lily Chakravarty) अभिनीत “Achanak” प्रमुख है|

Akshay Kumar & Ileana D’Cruz Starrer Rustom (2016) Film Story

फिल्म की कहानी नेवी ऑफिसर रुस्तम पावरी (Akshay Kumar) की है, जो अपनी पत्नी सिंथिया पावरी (Ileana D’Cruz) के साथ खुशहाल जीवन यापन कर रहा था| लेकिन अपने काम के कारण घर से उसका दूर रहना और बीवी का अकेलापन उनकी सुखद जिंदगी को एक पल में बदल देता है| जब रुस्तम को पता चलता है उसके ही करीबी दोस्त विक्रम मखीजा (Arjan Bajwa) का उसकी बीवी के साथ अवैध सम्बन्ध हैं| इसके ठीक बाद 3 गोलियां चलती हैं और सबकुछ बदल जाता है| अब इस क़त्ल का असली जिम्मेदार कौन है, इसमें सरकार की भूमिका का क्या योगदान रहता है? और आख़िरकार इस केस का क्या नतीजा आता है? इन सवालों के जवाब आपको अपने नजदीकी सिनेमाघरों में जाकर मूवी देखने पर ही मिल सकते है, तो फिर इंतज़ार किस बात का अपने परिवार के साथ जाये और मूवी का आनंद लीजिये|

Rustom Movie Review and Rating

Vella Di Rating: 7.8/10

‘रुस्तम’ फिल्म की कहानी 1959 में बॉम्बे के सबसे चर्चित मर्डर केस पर आधारित है। जब एक नेवी ऑफिसर कवास मानेकशॉ नानावटी ने अपनी बीवी के प्रेमी की हत्या कर दी थी। फिल्म की कहानी और पटकथा को विपुल के. रावल (Vipul K. Rawal) ने बड़े ही बेहतरीन और रोचक अंदाज़ में लिखा है| फिल्म को 50 के दशक में दर्शाया गया है, तो उसी ज़माने के हिसाब से संवाद और डायलाग लिखे गए है| लेकिन सबसे रोचक पहलु फिल्म का यही है की कहानी कहने का अंदाज़ काफी अलग और अच्छा है|

रुस्तम पावरी के नेवी अफसर के किरदार में अक्षय कुमार (Akshay Kumar) लाजवाब लगते है और उन्होंने साबित कर दिया की क्यूँ वो हरफनमौला खिलाड़ी कुमार होने के साथ-साथ उम्दा एक्टर हैं| पूरी फिल्म में अक्षय का काम काबिले-तारीफ़ है| इलियाना डीक्रूज (Ileana D’Cruz) और ईशा गुप्ता (Esha Gupta) का अभिनय काफी सहज है| अर्जन बाजवा (Arjan Bajwa), सचिन खेडेकर (Sachin Khedekar), कुमुद मिश्रा (Kumud Mishra), पवन मल्होत्रा (Pawan Malhotra) और उषा नादकर्णी (Usha Nadkarni) का काम भी अच्छा है|

टीनू सुरेश देसाई (Tinu Suresh Desai) का निर्देशन लाजवाब है, इससे पहले उन्होंने “1920 London” फिल्म का निर्देशन किया था| इसके साथ ही साथ संतोष ठुंडीईल (Santosh Thundiyil) की सिनेमाटोग्राफी भी लाजवाब है| फिल्म की लम्बाई को थोडा छोटा किया जाता तो फिल्म और भी ज्यादा क्रिस्प होती और एडिटिंग को और बेहतर किया जा सकता था|

रुस्तम फिल्म का संगीत (Music) अंकित तिवारी (Ankit Tiwari), अर्को परावो मुखर्जी (Arko Pravo Mukherjee), जीत गांगुली (Jeet Gannguli) और राघव सचर (Raghav Sachar) ने दिया है, जबकि गीत मनोज मुन्ताशिर (Manoj Muntashir) द्वारा लिखे गए है| फिल्म का संगीत फिल्म रिलीज़ से पहले ही लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है|

आतिफ असलम (Atif Aslam) का गाया गाना “तेरे संग यारा”, सुकृति कक्कर (Sukriti Kakar) का “रुस्तम वही”, अंकित तिवारी का “तय है”, जुबिन नौटियाल (Jubin Nautiyal) और आकांक्षा शर्मा (Akanksha Sharma) का “ढल जाऊ मैं”, श्रेया घोषाल (Shreya Ghoshal) का “जब तुम होते हो” और अरिजीत सिंह (Arijit Singh) और पलक मुछल (Palak Muchhal) का गाया गाना “देखा हजारो दफ़ा” सभी गीत कर्णप्रिय और फिल्म की कहानी पर खूब जमते है|

अगर आप मर्डर मिस्ट्री और क्राइम थ्रिलर फिल्मों के दीवाने हैं, तो आपको इस फिल्म को मिस नहीं करना चाहिए|

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