Zubaan (2016) Film Review: पहचान और अहसास की संजीदा कहानी, मगर कमज़ोर स्क्रीनप्ले

फिल्म के निर्देशक मोजेज़ सिंह से “जुबान” फिल्म से अपना बॉलीवुड डेब्यू किया है| दिलशेर के बहाने एक ऐसे नवयुवक की कहानी कही है, जो अपनी जिंदगी में खुद का स्वर और हस्ताक्षर पाना चाहता हैं| कई बार हम सभी अपने भौतिक सुखों की लालसा में अपने असली मकसद और मौलिक चाहत को नज़रंदाज़ कर देते हैं।

Vicky Kaushal & Sarah Jane Dias Starrer Zubaan (2016) Film Story

दिलशेर (विक्की कौशल) बच्चा है, अपने पापा के साथ गुरूद्वारे जाता है, जहां पर वो सबद और गुरुवाणी गाता है| उसके पिता बहरे हो रहे है और आवाज़ भी असर खो रही है, जिसके कारण वे एक दिन आत्महत्या कर लेते हैं| दिलशेर हकलाता है और इसकी वजह से वो दब्बू रह जाता है और साथ ही साथ संगीत से उसका साथ छुट जाता है| बचपन में उसको उसके आदर्श गुरुचरण सिकंद से सीख मिलती है कि खुद के भरोसे ही कुछ प्राप्त किया जा सकता है| दिलशेर बड़ा होता है और कुछ पाने के लिए दिल्ली आ जाता है यहाँ उसकी हसरत गुरुदासपुर के शेर गुरुचरण सिकंद से मिलने और उनके साथ काम करने की है|

Zubaan Movie Review 2016

गुरुचरण सिकंद आज खुद की एक बड़ी कंपनी का मालिक है, जो उसको उसके ससुर से बेटी और सम्पति दोनों मिली थी| व्यापार में माहिर और इरादे के पक्के गुरुचरण को अपना बेटा पसंद नहीं है और वो उसको चिड़ाने के लिए दिलशेर को बढ़ावा देता है| लेकिन आगे चलकर बेटे, बाप और माँ के संबंधो के बीच एक रहस्य उजागर होता है कि गुरुचरण अपने बेटे का असली पिता नहीं है| गुरुचरण को दिलशेर में अपने जैसा पक्का इरादा और जोश दिखता है| लेकिन अपनी पहचान में भटकते हुए दिलशेर को सबकुछ पाने के बाद महसूस होता है कि उसकी मंजिल कुछ और है|

बचपन में डर की वजह से वह संगीत से दूर हो गया था| अमीरा (सारा जेन डयास) उसे अहसास करवाती है की वह गाते वक़्त नहीं हकलाता है| यही हकलाहट ही उसकी हीनग्रंथि थी, जिससे उसको निजात सिर्फ गायकी से ही मिल सकती है| यहाँ से दिलशेर बड़ा होने के साथ समझदार भी हो जाता है|

Zubaan (2016) Movie Review and Rating

Vella Di Rating: 6.2/10

संदेह नहीं है कि मोजेज़ सिंह ने एक अलग तरह की कहानी कहने की कोशिश की है लेकिन उसमे सहजता नहीं रख पाये और घालमेल साफ़ दिख जाता है| जरुरत से ज्यादा नाटकीयता दिखाने के चक्कर में बहुत सारी उलझने| फिल्म की शुरुआत सोच समझ की राह पर चलती हुई होती है, मगर अतत: नादानी के गड्डे में गिर जाती है|

इस फिल्म में सभी कलाकारों ने सदा हुआ अभिनय किया है| यह फिल्म “मसान” फेम विक्की कौशल की पहली फिल्म है, लेकिन मसान पहले रिलीज़ हो गयी| विक्की कौशल ने दिलशेर के रूप में एक दब्बू, हकले युवक के साथ साथ पंजाबी लहजे को सही तरीके से पकड़ा है या कह सकते है कि हर अंदाज़ को पुरजोर तरीके से पेश किया है, फिल्म में उनका उम्दा अभिनय साफ़ दिखता है| जुबान देखकर लगता है कि विक्की कौशल अपनी पीढ़ी के संभावनाशील उम्दा अभिनेता है जो कभी भी लम्बी छलांग लगा सकते है| उनके अंदर एक अयव्क्त गुस्सा और उबाल है जो फिल्म के कुछ दर्श्यो में झलकता है|

सारा जेन डायस उनमें खालिस एनर्जी है, लेकिन उनके किरदार को लेखक ने सही तरीके से परिभाषित करने में नाकाम रहे है यहाँ वो सिर्फ किसी आवारा हवा-सी इधर-उधर गीत गाने के लिए ही थीं। उसके चेहरे पर भाव नहीं दिखते, हाँ दिलशेर की जिंदगी में उत्प्रेरक के रूप में दी गई भूमिका को सहज तरीके से निभाती हैं, लेकिन प्रभावित नहीं कर पातीं।

बिल्डर और सख्त पिता के किरदार में मनीष चौधरी जरूर असरदार है और लगातार अपने किरदारों को थोड़ी गहराई देकर मनोरंजक और दिलचस्प बना रहे हैं। बेटे के किरदार में राघव चानना है, जिन्होंने उस किरदार की निरीहता का खूबसूरती से पेश करते हैं| मां के किरदार को मेघना मलिक की मौजूदगी रहस्य़पूर्ण अर्थ देती है, उन्होंने उसे नकारात्मक नहीं होने दिया है, मगर एक औरत की तृष्णा और भावना को बखूबी जाहिर करती हैं।

फिल्म का संगीत हिंदी और पंजाबी गानों से भरा हुआ है| फिल्म के निर्देशक ने सुरजीत पातर और बाबा बुल्लेस शाह के गीतों का सदुपयोग किया है, लेकिन फिर भी फिल्म का अहम हिस्सा होने के कारण संगीत दिल को छु नहीं पाता है और यही फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है| ध्रुव तारा वाला गाना सारा जेन डायस पर बेहतरीन तरीके से फिल्माया गया है उसमें सप्तऋषि तारो का समूह भी दिखाया गया है| हिंदी गीतों की लिखावट काफी बढ़िया है| इसके साथ ही इंडोर डांस का फिल्मांकन भी अलग कांसेप्ट से किया गया है| फिल्म में गाने कम किये जा सकते थे क्यूंकि बार-2 गाने आने से ध्यान भटकता है|

निसंदेह फिल्म की कहानी अनोखी और दिलचस्प है, लेकिन स्क्रीनप्ले काफी कमज़ोर है| इंटरवल के बाद का हिस्सा और क्लाइमेक्स बेहद लचर है| फिल्म का आगाज़ शानदार होता है उतना ही भयानक उसका अंजाम हुआ है| फिल्म की स्क्रिप्ट में खास तरह की जर्नी, संगीत और रोमांस दिखाने की कोशिश की गयी है, लेकिन तीनों चीज़े मुकम्मल नहीं हो पायी, पठकथा और बेहतर हो सकती थी| लेकिन फिर भी फिल्म के सभी कलाकारों की दाद देनी होगी जिन्होंने अपने अभिनय से प्रभावित किया है|

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